आत्म -जागरूकता
आत्म जागरूकता ही, है जो आपकी जीवन की सोच को बदल सकती है|
ज्यादातर लोग कदाचित ही सतही स्तर से अधिक गहराई तक सोच पाते है, वे अपने जीवन में समस्याओं के वास्तविक समाधान सिखने व लागू करने के आनंद से वंचित रह जाते है |
कभी आपने आत्मचिंतन कर खुद से पूछा है की आप जीवन से क्या चाहते है?
क्या आप सही दिशा में बढ़ रहे हैं या नहीं? इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर देने के लिए, आपको आत्म-जागरूकता विकसित करनी होगी | खुद पर ध्यान देने की प्रक्रिया ही आत्म -जागरूकता है -आपके बिचार ,अहसास ,दृष्टिकोण ,प्रेरणाएँ और क्रियाएं | ठिठककर अपने बारे में ईमानदारी से बिचार करने और आस -पास की दुनिया से अपने संबंधों पर बिचार करने से आत्म -जागरूकता आती है |
आत्म -जागरूकता के अनेक फायदे है | यह आपको इसकी पहचान करने में मदद करती है कि आप वास्तव में अंदर से क्या महसूस कर रहे है और क्या सोच रहे है | यह आपको दुसरो की बातों या कार्यों से प्रभाबित होने के बजाय आपके निजी मूल्यों के अनुरूप कार्य करने में मदद करती है | यह आपको आपके अदुतियें बक्तित्व्य , कौशल और रुचियों का महत्व समझने में मदद करती है | जब आप आत्म -जागरूक होते है तो आप वे बिकल्प अपना सकते है जो आपके लिए सही होते है |
आतंरिक ईमानदारी का महत्व :-
आत्म -जागरूकता महत्वपूर्ण है, लेकिन कभी -कभी यह बहुत कठिन हो सकती है |ी मानदारी अर्थात अपनी सुदृढ़ताओं और कमजोरियों को स्पस्ट व् यर्थात ढंग से देखने की छमता की जरुरत पड़ती है | आतंरिक ईमानदारी,आत्म -ज्ञान का आधार है | खुद में सुधार के लिए , बिना बहुत कठोर या उदार हुए खुद की सही समीक्षा करना बहुत मायने रखता है | खुद से पूछे,"क्या मैं खुद को उसी तरह से देख पा रहा हूँ जो मैं वास्तब में हूँ ? क्या मै अति -आत्म विश्वासी हूँ, या मैं खुद को कमतर करके आंक रहा हूँ?" "क्या मेरे कार्य,मेरे बुनियादी मूल्यों से मेल खाते है?" "क्या मैं अपने साथियों से आसानी से प्रभाबित हो जाता है?"
आत्म -जागरूकता के लिए प्रयास करने होते है | अपने बारे में खुद को व् दुसरो को सच्चाई से अवगत करना इसमें शामिल है | अपने बारे में सच्चाई बताने का अर्थ है कि आप यह स्वीकार करते है कि आप मनुष्य है और इसलिए पूरी परफेक्ट नहीं है | ईमानदार होना , चुनौतीभरा हो सकता है क्योकि ऐसे बिचारों और एहसांसो को स्वीकार करना इसमें शामिल है जिन्हे हम नापसंद करते है | और जो हमारी आत्म -छवि से मेल नहीं खाते है | आतंरिक ईमानदारी के तहत आप अपने अतीत और वर्तमान के उन पहलुओं का सामना करते है जो अरुचिकर और दर्दभरे भी हो सकते है | इससे आपको दर्दभरे अहसांसो जैसे कि दुःख , विषाद , क्रोध ,भय ,शर्म या ग्लानि का भी सामना करना पड़ सकता है |
आतंरिक ईमानदारी के फायदे :-
सौभाग्य से , आतंरिक ईमानदारी के फायदे , इसके लिए किये जाने वाले प्रयासों से अधिक मूल्यवान होते है | आतंरिक ईमानदारी के साथ आप ये दोनों बातें समझ सकते है कि जो ब्यक्ति आप बनना चाहते है , उसके लिए आप क्या कर सकते है और आपको क्या करना होगा | जब आप अपने प्रति ईमानदार होते है , तो आप अपने सपनो , मूल्यों और रुचियों को महसूस कर सकते है | आप अपनी प्रगति पर गर्व कर सकते है क्योकि आपको पता होता है कि आपने सार्थक लक्ष्य तय किये है | और उन्हें हासिल करने के लिए आवश्यक प्रयास किये है |
जो आप है , जो आप सोचते है, और जिस तरह आप महसूस करते है , उन सबके बीच एक तालमेल बना रहता है |
आतंरिक रूप से अधिक ईमानदार बनने के लिए , किसी कक्षा में घूमते टेलिस्कोप के लेंसों से ब्रह्माण्ड देखने वाले और किसी नए ग्रह या तारे की खोज करने वाले खगोलविद की तरह खुद को देखने का प्रयास करे | खगोलबैज्ञानिक यह नहीं तय कर पाता कि उसने क्या पाया है , बल्कि वह इसे समझने का प्रयास करता है | इसी प्रकार ऐसा , मत सोचे कि वह " क्या होना चाहिए " बल्कि सोचे कि " वह क्या है | " अपनी खोजी हर चीज का हिसाब रखें , बर्तमान और भाबी सम्भाबनाओ और आनंद का बहुमूल्य खजाना , तथा आपके जीवन की पुराणी घटनाओ के असर , जिन्होंने आपके बिश्बासो को आकर दिया हो | प्रत्येक तत्त्व इस मामले में महत्वपूर्ण है क्योकि वह आपको अदुतिये बनाने में भूमिका निभाता है |
आत्म -चेतना :--
हममे से कोई भी आत्म --जागरूक पैदा नहीं होता , हम किशोर और वयस्क होने के साथ --साथ अपने बारे में अधिकाधिक सीखते जाते है | हलाकि कुछ लोग अपने बारे में चिंतन करने में दूसरों से ज्यादा समय देते है | अपने बारे में प्रायः चिंतन करने कि प्रबिर्ति , आत्म --चेतना कहलाती है |
मनोबैज्ञानिक प्रायः ब्यक्तिगत आत्म --चेतना और सार्वजनिक आत्म --चेतना के बीच अंतर करते है | निजी आत्म --चेतना , अपने निजी , आतंरिक पहलुओं के बारे में जानने की प्रबिर्ति होती है | सार्वजानिक आत्म --चेतना , अपने उन पहलुओं को जांनने की प्रबिर्ति होती है जो सामाजिक िस्थितियों में प्रदर्शित होते है |
निजी आत्म -चेतना :--
निजी आत्म --चेतना हमें खुद को समझने में मदद करती है | निजी आत्म --चेतन लोगो की आत्म --छवि प्रायः यर्थाथबादी और जटिल होती है | वे घनिष्ठ संबंधों में अपने गोपनीय पहलुओं को उजागर करते है | जिससे मानवीय सम्बन्ध मजबूत बनते है | और एकाकीपन के एहसांसो से निजात मिलती है |
सार्वजानिक आत्म --चेतना :--
निजी आत्म --चेतना की तरह सार्वजानिक आत्म -चेतना के भी अपने फायदे है | यह हमें यह समझने में मदद करते है कि इस तरह हमारा व्यवहार , दुसरो को प्रभाबित करता है , और यह हमें हमारी विभिन्न सामाजिक भूमिकाएं अपनाने में मदद करती है |
भावनात्मक जागरूकता :--
भावनात्मक रूप से अधिक जागरूक बनाने के लिए , खुद से ये तीन प्रश्न पूछते हुए अभ्यास करे : मेरा शरीर कैसा महसूस कर रहा है ? मेरे द्वारा यह भावना महसूस करने की शुरूआत से ठीक पहले क्या हुआ था ? क्या मै इस भावना को कोई बिशेष नाम दे सकता हूँ ? भावनाओ के शब्दों वाली एक शब्दाबली तैयार करने से आपको अपनी भावनाओ के प्रति अधिक जागरूक बनने में क्यों मदद मिलती है ?
आप कितने आत्म -चिंतक है ?

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