जब जरुरी हो तो ना कहना सीखे
दूसरों को खुश करने के लिए हर काम को हां करने की गलती ना करें।
कभी-कभी दूसरों को खुश रखने के लिए अपने आप को कई बार ऐसी स्थितियों में पाते हैं जब किसी दूसरे व्यक्ति को हां कहना या उसकी हां में हां मिलाना बड़ा आसान लगता है। पर अपनी इस आदत के कारण हम कई बार बड़ी गलतियां कर जाते हैं, जो आपके लिए फायदेमंद साबित नहीं होती है।
क्यों जरुरी है जीवन में ना कहना सीखना आइये जानते है : जिसे मई 10 बिंदु के माध्यम से मैं आपको समझने की कोशिश कर रहा हूँ, और मुझे यकीन अपनी सोच पर और गलत नहीं हूँ।
1. हर व्यक्ति की अपनी सोच होती है : ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की सोचने का अपना तरीका होता है। उस सोच विचार की क्षमता से खुद को वंचित न करते हुए और आप अपने निर्णय लेने की क्षमता का परिचय दें।
अपना विचार रखें।
2. अलग होने में कोई बुराई नहीं : दूसरे लोगों से अलग होना हमेशा गलत नहीं होता। इससे अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा मुद्दे से जुड़े विभिन्न पक्षों को समझने में मदद मिलती है ऐसे में सबसे अलग होने में भी कोई बुराई नहीं है।
3. दूसरों पर आंख मूंदकर विश्वास ना करें : किसी कार्य को करने की उपयोगिता का मूल्यांकन अपनी जरूरत के आधार पर करें। निर्णय आपके जीवन की वास्तविकता और उससे जुड़ी चीजों पर आधारित होना चाहिए।
4. चुने वही जो आपके लिए सही है : यह जरूरी नहीं कि जो किसी दूसरे व्यक्तियों के लिए उपयोगी हो आपके लिए भी उसी तरीके से उपयोगिता रखता हो। हर व्यक्ति अलग होता है। उसकी जरूरतें उसका व्यक्तित्व जरूरतों और चुनौतियां और स्थितियों का सम्मान करने के तरीके के आधार पर निर्णय करते है।
5. क्रोध से दूर रहें : निश्चय बने अपना पझ दूसरों के सामने रखते समय क्रोध में ना आए। उत्तेजित ना हो। क्या उपयोगी होगा और क्या नहीं इस संबंध में अपना पक्ष बताएं और द्दिढ़ निश्चय रहे।
6. आत्मविश्वास बने : अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें। यदि आप नहीं कर रहे हैं तो आपके पास अपनी परथमिकताएँ अपनी जरूरतों के आधार पर तय करें दूसरे क्या सोचता है इस बात पर नहीं सोचो। जो आपको सही लगता है वैसा करें ।
7. अपनी प्राथमिकताएं तय करें : अपनी क्षमताओं पर विश्वास करें यदि आप नहीं कह रहे हैं तो आपके पास अपनी प्राथमिकताएं अपनी जरूरतों के आधार पर तय करें दूसरे क्या सोचते हैं इस बात पर नहीं सोचे पूरी तरह सोच समझकर कोई निर्णय करें।
8. दूसरे को नकारे नहीं : किसी दूसरे की बात से सहमत होना या असहमत होना सीखना भी बेहद जरूरी है। पर हमेशा दूसरे के विचार को एक से देश से नकार देना भी उचित नहीं है इसलिए ध्यान से सुने उसका विश्लेषण करें और अपनी सोच समझ और जरूरतों को ध्यान में रहकर ही फैसला करें।
9. यदि संदेह है तो प्रश्न करें : यदि नहीं कर पा रहे हैं तो आपक आपको क्या करना चाहिए तो दूसरों लोगों पर आंख मूंदकर विश्वास करने की जगह दूसरे लोगों से बात करें इस संबंध में परिवार के सदस्यों और मित्रों से राय लेे सकते हैं।
10. आशा करना जिंदगी की सबसे बड़ी भूल है : जीवन में किसी पर आशा करके अपने कर्तव्यो को छोर कर किसी के भरोसे बैठ जाना की वो सब कर देगा ये अपनी जिंदगी से धोका ही कहा जायेगा।

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