मेरी पहली मोहब्बत

मेरी पहली मोहब्बत 

Love Story in hindi. The best Love Story in hindi.

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मेरी पहली मोहब्बत 

मैं 

मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करती है, की तुम होती तो शायद , मैं कुछ और होता। तुम होती तो ........ 

मैं तन्हाइयों में अक्सर यही सोच कर अपने - आप से बातें करता हूँ, की तुम सच ही कहा करती थी। तुम जो सोच सकते हो उसे कर भी सकते हो, तुम जो चाहते हो उसे हासिल भी कर सकते हो। लेकिन तुम होती तो शायद मैं कर सकता।

पर अचानक से, तुम छम करके गायब हो गई। क्यों ? अचानक चली गई, क्यों ? 

                                                                                        क्या गलती थी मेरी, मेरे बारे में जार भी नहीं सोचा की मेरा क्या होगा।मैं तो हमेशा तुम्हारे भले के लिए सोचा करता था। पता नहीं मुझे भी क्या हो गया है, तेरे जाने के बाद भी हमेशा तेरी यादों में ही खोया रहता हूँ की तुम शायद मेरे लिए फिर से वापस आओगी और मेरे सारे सपने पूरे होगें जो तुमने मेरे लिए सजाये थे। हरपल ऐसा लगता है।

मेरा उम्मीद और बुलंद होता है, जब तुम और तुम्हारी यादे अग्रसर मेरी तन्हाइयों में आती हो और यही कहा करती है। आज मैं तुम्हारा साथ देने आया हूँ। तुम्हारे अधूरे सपने पूरा करने आया हूँ। अग्रसर तेरी यादे, यही बातें मेरे साथ करती है और मैं हमेशा वहीं आकर बैठा करता था जहाँ तुम मुझसे मिला करती थी। मैं बैठा रहता था तेरी इंतजार में, की खैर तुम कल नहीं आई तो क्या हुआ आज तो तुम अब आओगी मेरे लिए नहीं तो अपना सपना पूरा  लिए जो तुमने जो मेरे साथ देखा था लेकिन आज फिर तुम नहीं आई। 

ऐसा भी क्या गलती हो गया था उस दिन जो अभी तक उसकी सज़ा हम से ज्यादा तुम अपने आप को दे रही हो। क्यों गुमनामी की जिंदगी जी रही हो। अब तो मन जाओ मेरे लिए नहीं तो कम-से-कम अपने लिए जो तुमने सपना देखी थी। उन सपनों को पूरा करने के लिए ही सही पर एक बार मुझेसे मिल तो एक बार। 

                        हर उम्मीद की साया हो तुम मेरी जीवन की सार हो तुम कहीं हो तुम पर, अभी भी मेरी निगाहें तुम्हें देखने के लिए तरसती रहती है हर राहों पर, आँखे बिछाएं हुए यही सोचता  हूँ , कि  तुम चली आ रही और तेरे इंतजार में दिन ढल जाता है और फिर कल सुबह फिर ये ऑंखें राहों पर नज़रे बिछाएँ तेरा इंतजार करता है। शायद इसलिए की तुम आज आओगी और फिर मुझे कहोगी, कि  तुम करना शुरू करो कामयाबी तेरे कदम चूमेंगे। तुम कर सकते हो,तुम कर सकते हो।

फिर भी मेरा सवाल होगा तुमसे की ऐसा भी क्या गलती हुई थी मुझ से की तुम मुझे छोड़ कर चली गई।क्यों ? 

हर खब्ब देखे थे, मैंने तेरे साथ। जिस खब्ब की नींव रखी भी तूने मेरे साथ वो आज भी आधुरी  है! तेरे जाने के बाद वीराना खण्डार की तरह जिसमें इमारते तो दिखाई देती है पर रहता कोई नहीं। जिससे  मैं अब खुद देखता हूँ तो डर लगता है। की उस खब्ब में ऐसी क्या गलती थी? मेरी जिसकी दिवार भी तुम थी और नींव भी तुम।

अक्सर मैं और मेरी तन्हाई बाटे करती है की ऐसी भी क्या गलती हो गई थी की बिना बताये तुम चली गई।

बहुत उम्मीद था तुमसे जो अभी भी कोई कमी नहीं आई है अक्सर तेरे इंतजार में निगहें रहो में बिछाए बैठा रहता हूँ।   

                हर एक पल - पहर, हर एक दिन-रात, ये मेरी ऑंखें तुम्हे ही दुढ़ती रहती है। शायद तुम होती तो,शायद तुम होती तो मैं वो कर सकता हो, वर्षों पहले तुमने मेरे लिए सोचा था पर तुम होती तो। 

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