एक व्यक्ति की सच्ची प्रेम कहानी उसकी जुवानी
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आपकी यादों की महक इन हवाओं में है, कुछ अपना पन सा इन फिजाओं में है।
खुशियाँ चूमें आपके कदमें हमेशा, यही सपना इन निगाहों में है।
मैं और मेरी तन्हाई अक्सर ये बातें करते है, कि तुम होती तो शायद, मैं कुछ और होता तुम होती तो।
तन्हाइयों में अक्सर यही सोच कर अपने आप से बातें करता हूं, कि तुम सच कहा करती थी। तुम जो सोच सकते हो, उसे कर भी सकते हो, तुम जो चाहते हो, उसे हासिल भी कर सकते हो। लेकिन तुम होती तो शायद मैं कर सकता। पर अचानक से तुम छम करके गायब हो गई। क्यों अचानक चली गई ? क्यों ?
मेरा क्या गलती था ? मेरे बारे में जारा भी नहीं सोची की मेरा क्या होगा ? मैं तो हमेशा तुम्हारे भले के लिए सोचा करता था। पता नहीं, मुझे क्या हो गया है ? तुम्हारे चले जाने के बाद हमेशा तेरी यादों में ही खोया रहता हूं। तुम शायद मेरे लिए फिर से वापस आओगी और मेरे सारे सपने पूरे होंगे जो तुमने मेरे लिए सजाए थे। हर पल ऐसा लगता है कि तुम मेरे लिए वापस आयेगी।
हर कोई सच्चा प्यार नहीं होता, हर दोस्त वफादार नहीं होता।
दिल आने की बात है वरना सात फेरों के बाद भी प्यार नहीं होता।
मेरा उम्मीद और बुलंद होता है, जब तुम और तुम्हारी यादें अक्सर मेरी तन्हाईयों में आती है। तुम यही कहा करती थी, आज मैं तुम्हारा साथ देने आया हूं तुम्हारे अधूरे सपने पूरा करने आया हूं।
इसी उम्मीद में आश लगा कर बैठा था। तेरे इंतजार में की तुम अब मेरे लिए तो नहीं आओगी। अपने लिए आएगी जो तेरे सपने थे। मेरे साथ उसे पूरा करने के लिए आओगी। पर फिर भी तुम नहीं आई।
ऐसा भी क्या गलती हो गया था जो उस दिन से अभी तक उसकी सजा हम से ज्यादा अपने आप को दे रही हो। अपने कार्यों की सफलता के लिए भी मुझ से नहीं मिलना चाहती हो। जो तुमने मेरे साथ सपने सजाया था।
हर उम्मीद की साया हो, तुम मेरी जीवन की सार हो, तुम कहीं हो, अभी भी मेरी निगाहें तुम्हें तरसती रहती है, राहों पर आंखें बिछाए हुए यही सोचता हूं, कि तुम चली आ रही हो और तेरे इंतजार में दिन ढल जाता है और फिर कल सुबह फिर से ये आखें उन्हीं राहों में नजरे बिछाए तेरा इंतजार करता है। शायद इसलिए कि तुम आज चली आओगी और फिर मुझे कहोगी तुम करना शुरू करो अपने कार्यों को कामयाबी तेरे कदम चूमेगा। तुम कर सकते हो, तुम कर सकते हो, तुम यही कहोगी इसी का इंतजार है, हमें कि तुम आओगी और मैं कर सकता हूं।
हर कोई सच्चा यार नहीं होता, हर दोस्त वफादार नहीं होता।
दिल आने की बात है वरना सात फेरों के बाद भी प्यार नहीं होता।
फिर भी मेरा सवाल होगा तुमसे ऐसा भी क्या गलती था मेरा कि तुम मुझे छोड़ कर चली गई। क्यों?
हर ख्वाब देखे थे, मैंने तेरे साथ जिस ख्वाब की नीव रखी थी तूने मेरे साथ वह आज भी अधूरा है तेरे जाने के बाद वीरान खंडहर की तरह जिसमें इमारत तो दिखाई देती है पर आता कोई नहीं जिसे मैं खुद देखता हूं तो डर लगता है की नींद के ख्वाब से भी ज्यादा डरावना है।
अकसर मैं और मेरी तन्हाई बातें करती है कि ऐसी भी क्या गलती हो गई थी कि बिना बताए तुम चली गई।
बहुत उम्मीद था तुमसे जो अब भी कोई कमी नहीं आई है, अक्सर तेरे इंतजार में यह निगाहें राहों में बिछाए बैठा रहता हूं। हर एक पल-पहर, हर एक दिन शाम यह तेरी राह देखती है मेरी आंखें तुम्हें ही ढूंढती है।
शायद तुम होती तो, शायद तुम होती तो मैं वह कर सकता था जो बरसों पहले तुमने मेरे लिए सोचा था। पर तुम होती तो।
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